रविवार, 31 मई 2020

52 क्रूरताएँ_ऑन_गॉड कबीर

कबीर साहेब जी सन 1398 में भारत की धरती पर काशी शहर के अंदर लहरतारा तालाब में सीधे सतलोक से प्रगट हुए हुए एवं 120 वर्ष इस धरती पर रहकर सत भक्ति मार्ग का परिचय सारी दुनिया को कराया और वास्तविक परमेश्वर की जानकारी दी।
वह स्वयं ही परमेश्वर बनकर इस धरती पर 120 वर्ष लीला करते रहे पाखंडवाद कुरीतियों भ्रम आत्मक क्रियाकलापों से लोगों को मुक्ति दिलाई आज लगभग 623 वर्ष वर्ष बीत जाने के बाद हमारे पवित्र चारों वेद पुराण शास्त्र कुरान बाइबल मैं वही साकार परमात्मा के रूप में कबीर देव जी का नाम अनेक अनेक जगह विद्यमान हैं एक बहुत बड़ी बात है।

उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की थी।उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्म के धर्म गुरुओं ने उनके ज्ञान को जनता तक न पहुंचाने के लिए बहुत कोशिश की उनको जान से मारने के लिए कई प्रयत्न किए..
कबीर परमेश्वर को तोप के गोलों से मारने की व्यर्थ चेष्टा की"
कबीर जी को मारने के लिए शेखतकी के आदेश पर पहले पत्थर मारे, फिर तीर मारे।
परन्तु परमेश्वर की ओर पत्थर या तीर नहीं आया। फिर चार पहर तक तोप यंत्र से गोले चलाए गए।
लेकिन दुष्ट लोग अविनाशी कबीर जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके।

बुधवार, 20 मई 2020

मानवता का उत्थान।

                          मानवता का उत्थान
 मानव जीवन के उत्थान के लिए आज देश में अनेक सामाजिक संस्थाएं काम कर रही है। लेकिन इसके परिणाम की बात करें तो परिणाम शून्य ही मिलता है। आज भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, चोरी-जारी, लूट-कपट, दहेज, मृत्युभोज, जैसी बुराइयां समाज में जोर-शोर से फैल रही है। इनको रोकने में सभी संस्थाएं लगभग नाकाम सी रही है। इसी बीच वर्तमान में एक धार्मिक संस्था या यू क कहे एक धार्मिक संत जो समाज सुधार में बहुत ही सफल तरीके से आगे आए हैं।
उनके द्वारा 
विभाजित मानव को एक सूत्र में बांधने के लिए आध्यात्म ज्ञान के द्वारा प्रयत्न करना।
विवाह में दहेज लेना व देना बन्द कराना।
जीव हिंसा पाप है :- माँस न खाने तथा जीव हिंसा न करने के लिए मानव समाज को प्रेरित करना तथा जीव हिंसा के पाप से परिचित करना है।
चोरी, जूआ आदि अपराध करने से मानव को आध्यात्म ज्ञानके आधार से बचाना।
संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में अनेकों दहेज मुक्त सामूहिक विवाह हुए हैं।
जिसका उद्देश्य, 
कन्या भ्रूण हत्या का पूर्ण अंत करना।
दहेज रूपी राक्षस का अंत। 
समाज में शांति और भाईचारा स्थापित करना। 
तथा 
पूर्ण रूप से नशा मुक्त भारत
अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें मंगल प्रवचन साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।

गुरुवार, 14 मई 2020

स्कूलों में शिक्षा का लचर स्तर भारत के लिए एक बड़ा खतरा।

स्कूलों में शिक्षा का लचर स्तर भारत के लिए एक बड़ा खतरा

प्राथमिक शिक्षा की हालत बेहद ही खराब है। प्राथमिक शिक्षा के लिए देशभर में सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन फिर भी प्राथमिक स्तर के शिक्षा की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण कहा जा सकता है।

विद्यालय में प्राथमिक शिक्षकों की भारी कमी

देश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। अब कल्पना कीजिये कि जिस विद्यालय में शिक्षक ही नहीं हो वहां के बच्चों की स्थिति क्या होगी। 

ताजा हालात से निकलने का एक ही तरीका है कि स्कूली शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर और जोर दिया जाए. शिक्षकों की भर्ती के मानक कड़े हों और उनका भी समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए. जिन स्कूलों का प्रदर्शन अच्छा हो उन्हें पुरस्कृत किया जाए तो वहीं खराब नतीजे देने वाले स्कूलों के लिए सजा का प्रावधान भी हो. जैसे कि सजा के तौर पर यहां के प्रबंधन में बदलाव किया जा सकता है।

 एक और बदलाव शिक्षा में अगर करना है तो वह है छात्रों व शिक्षकों को आध्यात्मिकता की और जोड़ना..
जिससे समाज  व देश को चोरी  बलात्कार रिश्वतखोरी जैसी  बुराइयों से बचाया जा सकता है।  वर्तमान में आध्यात्मिक ज्ञान संत रामपाल जी महाराज  ने सभी धर्म के धर्म शास्त्रों से उजागर किया है।

 आध्यात्मिक ज्ञान की  जानकारी के लिए कृपया अवश्य देखिए साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।

बुधवार, 13 मई 2020

सच्चा भगवान कौन है

सच्चा भगवान कौन है? 
भगवान का अर्थ स्वामी, मालिक, प्रभु, 
इसी के पर्यायवाची नाम है राम, अल्लाह, रब, परमात्मा, आदि आदि हम उसे साहेब कहते हैं। भगवान कहते हैं। 
अविनाशी होने के कारण सत साहेब कहते हैं। 
क्योंकि सत्य का अर्थ अविनाशी होता है  उदाहरण के लिए जैसे सरपंच साहब, चेयरमैन साहब, विधायक साहब, मंत्री साहब, मुख्यमंत्री साहब, केंद्र का मंत्री साहब, प्रधान मंत्री साहब, यह सब साहेब कहलाते हैं परंतु इनकी शक्ति में अंतर है इसी प्रकार भगवान तो अनेक है लेकिन उनकी शक्ति में अंतर है।

 जेसे एक ब्रह्मांड में ब्रह्म जिसे क्षर पुरुष कहते यह भी भगवान है। राम है यह 21 ब्रह्मांड का मालिक है यहा एक ब्रह्मांड में  जीवन चालू रखता है अन्य खाली रहते हैं जब एक ब्रह्मांड का विनाश समय होता है तो दूसरे ब्रह्मांड में जीवन शुरू कर लेता है एक ब्रह्मांड में तीन लोक हैं।
(1)पृथ्वी लोग जिस पर हम रह रहे हैं
(2)स्वर्ग लोक
(3)पाताल लोक
और इनके ऊपर एक ब्रह्मलोक भी है जो इन से भिन्न है इन तीन लोको तथा  ब्रह्मलोक का मालिक यानी मुख्यमंत्री ब्रह्म अर्थात क्षर पुरुष है।
इसके 3 पुत्र हैं जिनको तीनों लोकों में एक-एक विभाग का मंत्री बना रखा है।
1.श्री ब्रह्मा जी रजगुण विभाग के मंत्री अर्थात भगवान है। 2.श्री विष्णु जी सद्गुण विभाग के मंत्री अर्थात भगवान है।
3.श्री शिवजी तमगुण विभाग के मंत्री अर्थात भगवान है। उपरोक्त प्रभु एक ब्रह्मांड में बने केवल 3 लोको के स्वामी है हमारे को कर्म का फल यह तीनों प्रभु ही देते हैं इसलिए यह हमारे संसार रूपी परिवार के गणमान्य सदस्य हैं।
स्वर्ग लोक में  33 करोड़ देवता पद है। जैसे भारतवर्ष की संसद में 540 सांसदों के पद है  व्यक्ति बदलते रहते हैं उन्हीं सांसदों में से प्रधानमंत्री तथा अन्य केंद्रीय मंत्री आदि आदि बनते हैं।  33 करोड़ देवताओं में से ही अन्य देव पद प्राप्त होते हैं जैसे कुबेर का पद अर्थात धन के देवता का पद प्राप्त होता है  वरुण देव जो जल का देवता है अन्य धर्मराय मुख्य न्यायाधीश है जो सब जीवो को कर्मों का फल देता है उसे धर्मराज भी कहते हैं यह सब काल ब्रह्म की साधना करके पद प्राप्त करते हैं पुण्य समाप्त होने के पश्चात सब देवता पद से  मुक्त करके पशु-पक्षी आदि की 8400000 प्रकार की योनि में डाले जाते हैं।

इनके पिताजी 21 ब्रह्मांड के स्वामी है प्रभु है भगवान है जिससे भगवत गीता में क्षर पुरुष कहा है।
इसके बाद अक्षर पुरुष यह 7. शंख ब्रह्मांड का मालिक है। स्वामी है भगवान है। इन दोनों भगवान अर्थात प्रभु का वर्णन गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में है इन दोनों से  उत्तम पुरुष यानी उत्तम भगवान अन्य है वह परम अक्षर पुरुष है यह असंख्य ब्रह्मांड का स्वामी, है भगवान है।


यह कुल का मालिक है जो सब भक्तों का पूज्य है जिसका वर्णन गीता अध्याय 15 श्लोक 17, गीता अध्याय 18 श्लोक 62, गीता अध्याय 15 श्लोक 4, तथा गीता अध्याय 8 श्लोक 8, 9, 10,तथा 20, 21, 22, में है यह परम अक्षर ब्रह्म संसार रूपी वृक्ष की जड़ है। इसका प्रमाण गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा 17 में है।
 यह वह परमात्मा है जिसके विषय में संत गरीबदास जी महाराज ने कहा है 
"भजन करो उस रब का जो दाता है कुल सबका"
यह सब  ब्रह्मांड का मालिक है सबका उत्पत्ति करता है।
अब यह प्रश्न उठता है कि यह परम अक्षर पुरुष (भगवान) कौन है जिसने सबकी उत्पत्ति की है यह जटिल प्रश्न का उत्तर वर्तमान में संत रामपाल जी के अलावा कोई नहीं बता सका उन्होंने सभी धर्म के पवित्र धर्म ग्रंथों में प्रमाण देकर बताया है
 है कि पूर्ण परमात्मा (भगवान) कबीर साहेब हैं। और वह सचखंड सनातन स्थान अर्थात सतलोक में एक राजा की तरह सिंहासन पर विराजमान है जो सबके पालनहार है।
कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर सर्व ब्रह्मण्डों व प्राणियों को अपनी शब्द शक्ति से उत्पन्न करने के कारण (जनिता) माता भी कहलाता है तथा (पित्तरम्) पिता तथा (बन्धु) भाई भी वास्तव में यही है तथा (देव) परमेश्वर भी यही है। - पवित्र अथर्ववेद

शुक्रवार, 8 मई 2020

सतलोक चलना है।

 सतलोक ,,पृथ्वी लोक से 16 शंख  कोस की कुछ दूरी पर  स्थित है।
 सतलोक में सभी मनुष्यों के पास अपने घर हैं 
और सभी के पास पुष्पक विमान हैं। 
सतलोक में बाग-बगीचे हमेशा हरे भरे रहते हैं। 
सतलोक शास्वत स्थान है।हम सभी मनुष्य व जितने भी जीव जंतु हैं। 
पहले सतलोक में रहते थे वहाँ जन्म मरण नहीं होता है ।और हम कभी दुःखी नहीं होते और पूर्ण परमात्मा की भक्ति करते हैं।
सतलोक ऐसा अमर लोक है जहाँ एक हंस आत्मा के शरीर का तेज 16 सूर्यों के समान है लेकिन उसमें गर्मी नहीं है।

सच्चा सतगुरु


जब तक सच्चे सतगुरु के सत्संग के विचार सुनने को नहीं मिलते तो भूलवश मानव अहंकार में जीता है।
सच्चे सतगुरु के सत्संग से पता चलता है कि परमात्मा अहंकार से कोसों दूर है।
और इस मनुष्य शरीर का सदुपयोग कैसे करना चाहिए ये भी सच्चै सतगुरु के सत्संग में ही पता चलता है।

 पूर्ण संत के सत्संग सुनने से चरित्र निर्माण होता है जिससे स्वछ समाज व देश का निर्माण होता है।

पूर्ण संत की पहचान

तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वेद के जानने वाला कहा जाता है।




गीता अध्याय 4 श्लोक 34 मैं जिस तत्वदर्शी संत के बारे मैं लिखा गया है वह तत्वदर्शी संत आज हरियाणा की पावन  धरती पर विराजमान है !
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 देखिए साधना टीवी 7:30 pm
Must watch sadhna

गुरुवार, 7 मई 2020

जन्म मरण का मूल कारण कौन है? तथा इस से छूटने का उपाय क्या है?



संत गरीबदास जी महाराज ने इसका उत्तर दिया है कि इस जन्म-मरण का मूल कारण अविद्या यानि तत्वज्ञान का अभाव है। जिस कारण से जन्म-मरण के फेर यानि चक्र को नहीं समझ सके जो कर्मों के कारण हो रहा है। सत्य भक्ति के अभाव से पाँच तत्व तथा पच्चीस प्रकृति अपने स्वभाव से कर्म कराकर जीवन नष्ट करा देती है। फिर अपने-अपने भागों में बाँट ले जाती है।सत्यनाम बिन यह शरीर रूपी नगर सूना (खाली) है। इस शरीर में इच्छाओं तथा इच्छा पूर्ण न होने की चिंता तथा अन्य दुःख-सुख का ढ़ोल बज रहा है, शोर हो रहा है। जैसे लड़का उत्पन्न हुआ तो खुशी का शोर। उस शोर में भगवान भूल गया। फिर लड़का मर गया। फिर दुःख की रोहा-राट (हाहाकार) रूपी शोर। उस शोर में परमात्मा की भूल।


इस प्रकार यह जीवन इस चूं-चूं में समाप्त हो जाता है। कभी धन इकट्ठा करने के विचारों का शोर।
इस प्रकार मानव शरीर का मूल कार्य छोड़कर जीवन अंत कर दिया। लूट न लूटि बंदगी यानि राम नाम इकट्ठा नहीं किया। हे हंस, हे भोले मानव! भोर हो गया यानि मृत्यु हो गई। जैसे भोर (सुबह) नींद खुलती है, स्वपन समाप्त होता है तो स्वपन में बना राजा अपनी झौंपड़ी में खटिया पर पड़ा होता है। इसी प्रकार मानव शरीर रहते भक्ति नहीं की तो मृत्यु उपरांत पशु-पक्षी वाली योनि रूपी खटिया पर पड़ा होगा यानि पशु-पक्षी बनकरकष्ट पे कष्ट उठाएगा।

गरीब,  अगम निगम को खोज ले, बुद्धि विवेक विचार।
            उदय-अस्त का राज दे, तो बिन नाम बेगार।।

अधिक जानकारी के लिए कृपया अवश्य सुने
संत रामपाल जी के  मंगल प्रवचन
साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।

बुधवार, 6 मई 2020

कोरोना का इलाज

कोरोना का इलाज सतभक्ति से...
जब विज्ञान खत्म होता है।
तब आध्यात्मिक ज्ञान शुरू होता है।

जब कोरोना जैसी आपदाओं में साइंस भी फेल हो जाती है तब आध्यात्मिक  शक्ति से ही  इनका इलाज संभव है। भगवान के आगे साइंस दो कौड़ी का भी नहीं है अब देख लो कोरोना वायरस का इलाज नहीं.. ना जाने ऐसे कितने बीमारी आ जाए मनुष्य जीवन में इससे बचने के लिए भगवान  की शास्त्र अनुकूल सत भक्ति ही करनी चाहिए।  क्योंकि ऐसे जानलेवा रोगों से केवल सत भक्ति से ही बचाव है।


आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ने के बाद बीमारियां नजदीक नहीं आती। संत रामपाल जी महाराज से जुड़कर लाखों लोग स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
आपसे अनुरोध है कि आप भी अपनी भक्ति विधि बदलिये।

जानकारी के लिए देखें कृपया साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।


भाई दूज कितनी सहायक

  भाई दूज कितनी सहायक भाई दूज का त्योहार दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन विगीता बहनें भाई बहन अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर पर ...