कबीर साहेब जी सन 1398 में भारत की धरती पर काशी शहर के अंदर लहरतारा तालाब में सीधे सतलोक से प्रगट हुए हुए एवं 120 वर्ष इस धरती पर रहकर सत भक्ति मार्ग का परिचय सारी दुनिया को कराया और वास्तविक परमेश्वर की जानकारी दी।
वह स्वयं ही परमेश्वर बनकर इस धरती पर 120 वर्ष लीला करते रहे पाखंडवाद कुरीतियों भ्रम आत्मक क्रियाकलापों से लोगों को मुक्ति दिलाई आज लगभग 623 वर्ष वर्ष बीत जाने के बाद हमारे पवित्र चारों वेद पुराण शास्त्र कुरान बाइबल मैं वही साकार परमात्मा के रूप में कबीर देव जी का नाम अनेक अनेक जगह विद्यमान हैं एक बहुत बड़ी बात है।
कबीर जी को मारने के लिए शेखतकी के आदेश पर पहले पत्थर मारे, फिर तीर मारे।
परन्तु परमेश्वर की ओर पत्थर या तीर नहीं आया। फिर चार पहर तक तोप यंत्र से गोले चलाए गए।
लेकिन दुष्ट लोग अविनाशी कबीर जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके।
वह स्वयं ही परमेश्वर बनकर इस धरती पर 120 वर्ष लीला करते रहे पाखंडवाद कुरीतियों भ्रम आत्मक क्रियाकलापों से लोगों को मुक्ति दिलाई आज लगभग 623 वर्ष वर्ष बीत जाने के बाद हमारे पवित्र चारों वेद पुराण शास्त्र कुरान बाइबल मैं वही साकार परमात्मा के रूप में कबीर देव जी का नाम अनेक अनेक जगह विद्यमान हैं एक बहुत बड़ी बात है।
उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की थी।उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्म के धर्म गुरुओं ने उनके ज्ञान को जनता तक न पहुंचाने के लिए बहुत कोशिश की उनको जान से मारने के लिए कई प्रयत्न किए..
कबीर परमेश्वर को तोप के गोलों से मारने की व्यर्थ चेष्टा की"कबीर जी को मारने के लिए शेखतकी के आदेश पर पहले पत्थर मारे, फिर तीर मारे।
परन्तु परमेश्वर की ओर पत्थर या तीर नहीं आया। फिर चार पहर तक तोप यंत्र से गोले चलाए गए।
लेकिन दुष्ट लोग अविनाशी कबीर जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके।
















