इस प्रकार यह जीवन इस चूं-चूं में समाप्त हो जाता है। कभी धन इकट्ठा करने के विचारों का शोर।
इस प्रकार मानव शरीर का मूल कार्य छोड़कर जीवन अंत कर दिया। लूट न लूटि बंदगी यानि राम नाम इकट्ठा नहीं किया। हे हंस, हे भोले मानव! भोर हो गया यानि मृत्यु हो गई। जैसे भोर (सुबह) नींद खुलती है, स्वपन समाप्त होता है तो स्वपन में बना राजा अपनी झौंपड़ी में खटिया पर पड़ा होता है। इसी प्रकार मानव शरीर रहते भक्ति नहीं की तो मृत्यु उपरांत पशु-पक्षी वाली योनि रूपी खटिया पर पड़ा होगा यानि पशु-पक्षी बनकरकष्ट पे कष्ट उठाएगा।
गरीब, अगम निगम को खोज ले, बुद्धि विवेक विचार।
उदय-अस्त का राज दे, तो बिन नाम बेगार।।
अधिक जानकारी के लिए कृपया अवश्य सुने
संत रामपाल जी के मंगल प्रवचन
साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।


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