गुरुवार, 25 जून 2020

काशी में करोत की कथा

काशी में करोत की कथा
शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण करने यानि शास्त्रों में लिखी भक्ति विधि अनुसार साधना न करने से गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में लिखा है कि उस साधक को न तो सुख की प्राप्ति होती है, न भक्ति की शक्ति (सिद्धि) प्राप्त होती है, न उसकी गति (मुक्ति) होती है अर्थात् व्यर्थ प्रयत्न है। हिन्दु धर्म के धर्मगुरू जो साधना साधक समाज को बताते हैं, वह शास्त्र प्रमाणित नहीं है। जिस कारण से साधकों को परमात्मा की ओर से कोई लाभ नहीं मिला जो भक्ति से अपेक्षित किया।   

फिर धर्मगुरूओं ने एक योजना बनाई कि भगवान शिव का आदेश हुआ है कि जो काशी नगर में प्राण त्यागेगा, उसके लिए स्वर्ग का द्वार खुल जाएगा। वह बिना रोक-टोक के स्वर्ग चला जाएगा। जो मगहर नगर (गोरखपुरके पास उत्तरप्रदेश में) वर्तमान में जिला-संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में है, उसमें मरेगा,वह नरक जाएगा या गधे का शरीर प्राप्त करेगा। गुरूजनों की प्रत्येक आज्ञा का पालन करना अनुयाईयों का परम धर्म माना गया है। इसलिए हिन्दु लोग अपने-अपने माता-पिता को आयु के अंतिम समय में काशी (बनारस) शहर में किराए पर मकान लेकर छोड़ने लगे।यह क्रिया धनी लोग अधिक करते थे। धर्मगुरूओं ने देखा कि जो यजमान काशी में रहनेलगे हैं, उनको अन्य गुरूजन भ्रमित करके अनुयाई बनाने लगे हैं। काशी, गया, हरिद्वार आदि-आदि धार्मिक स्थलों पर धर्मगुरूओं (ब्राह्मणों) ने अपना-अपना क्षेत्र बाँट रखा है। यदि कोई गुरू अन्य गुरू के क्षेत्र वाले यजमान का क्रियाकर्म कर देता है तो वे झगड़ा कर देते हैं। मारपीट तक की नौबत आ जाती है। वे कहते हैं कि हमारी तो यही खेती है, हमारा निर्वाह इसी पर निर्भर है। हमारी सीमा है। इसी कारण से काशी के शास्त्र विरूद्ध साधना कराने वाले ब्राह्मणों ने अपने यजमानों से कहा कि आप अपने माता-पिता को हमारे घर रखो। जो खर्च आपका मकान के किराए में तथा खाने-पीने में होता है, वह हमें दक्षिणा रूप में देते रहना।

हम इनकी देखरेख करेंगे। इनको कथा भी सुनाया करेंगे। उनके परिवार वालों को यह सुझाव अति उत्तम लगा और ब्राह्मणों के घर अपने वृद्ध माता-पिता को छोड़ने लगे और ब्राह्मणों को खर्चे से अधिक दक्षिणा देने लगे। इस प्रकार एक ब्राह्मण के घर प्रारम्भ में चार या पाँच वृद्ध रहे। अच्छी व्यवस्था देखकर सबने अपने वृद्धों को काशी में गुरूओं के घर छोड़ दिया। गुरूओं ने लालच में आकर यह आफत अपने गले में डाल तो ली, परंतु संभालना कठिन हो गया। वहाँ तो दस-दस वृद्ध जमा हो गए। कोई वस्त्रों में पेशाब कर देता, कोई शौच आँगन में कर देता। यह समस्या काशी के सर्व ब्राह्मणों को थी। तंग आकर एक षड़यंत्र रचा। गंगा दरिया के किनारे एकान्त स्थान पर एक नया घाट बनाया। उस पर एक डाट (तबी) आकार की गुफा बनाई। उसके बीच के ऊपर वाले भाग में एक लकड़ी चीरने का आरा यानि करौंत दूर से लंबे रस्सों से संचालित लगाया। उस करौंत को पृथ्वी के अंदर  रस्सों से लगभग सौ फुट दूर से मानव चलाते थे। ब्राह्मणों ने इसी योजना के तहत नया समाचार अपने अनुयाईयों को बताया कि परमात्मा का आदेश आया है। पवित्र गंगा दरिया के किनारे एक करौंत परमात्मा का भेजा आता है। जो शीघ्र स्वर्ग जाना चाहता है, वह करौंत से मुक्ति ले सकता है। उसकी दक्षिणा भी बता दी। वृद्ध व्यक्ति अपनी जिंदगी से तंग आकर अपने पुत्रों से कह देते कि पुत्रो! एक दिन तो भगवान के घर जाना ही है, हमारा उद्धार शीघ्र करवा दो। इस प्रकार यह परंपरा जोर पकड़ गई।बच्चे-बच्चे की जुबान पर यह परमात्मा का चमत्कार चढ़ गया। अपने-अपने वृद्धों को उस करौंत से कटाकर मुक्ति मान ली। यह धारणा बहुत दृढ़ हो गई। कभी-कभी उस करौंत का रस्सा अड़ जाता तो उस मरने वाले से कह दिया जाता था कि तेरे लिए प्रभु का आदेश नहीं आया है। एक सप्ताह बाद फिर से किस्मत आजमाना। इस तरह की घटनाओं से जनता को और अधिक विश्वास होता चला गया। जिसके नम्बर पर करौंत नहीं आता था, वह दुःखी होता था। अपनी किस्मत को कोसता था। मेरा पाप कितना अधिक है। मुझे परमात्मा कब स्वीकार करेगा? वे पाखण्डी उसकी हिम्मत बढ़ाते हुए कहते थे कि चिन्ता न कर, एक-दो दिन में तेरा दो बार नम्बर लगा देंगे। तब तक रस्सा ठीक कर लेते थे और हत्या का कामजारी रखते थे। इसको काशी में करौंत लेना कहते थे और गारण्टिड 
(जिम्मेदारी व विश्वास के साथ) मुक्ति होना मानते थे। स्वर्ग प्राप्ति का सरल तथा जिम्मेदारी के साथ होना माना जाता था जबकि यह अत्यंत निन्दनीय अपराधिक कार्य था।

सच्चा सतगुरु वही है जिसके द्वारा बताई गई भक्ति विधि शास्त्र प्रमाणित हो।
शास्त्र प्रमाणित भक्ति पूरे विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।

शुक्रवार, 12 जून 2020

श्रीमद्भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य

श्रीमद्भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य

गीता अध्याय 16 श्लोक 23
जो साधक शास्त्रविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से
मनमाना आचरण करता है..
वह न सिद्धि को प्राप्त होता है।
न उसे कोई सुख प्राप्त होता है,
न उसकी गति यानि मुक्ति होती है
अर्थात्

शास्त्र के विपरित भक्ति करना व्यर्थ है।




वास्तविक भक्ति विधि के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु (ब्रह्म) किसी तत्वदर्शी की खोज करने को कहता है (गीता अध्याय 4 श्लोक 34) इस से सिद्ध है गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) द्वारा बताई गई भक्ति विधि पूर्ण नहीं है।


गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है। गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि मैं भी उसी की शरण में हूँ।

बुधवार, 10 जून 2020

पवित्र बाइबल में अनेक प्रभुओं का प्रमाण

पवित्र बाइबल में अनेक प्रभुओं का प्रमाण - पवित्र बाईबल

3:22. फिर यहोवा प्रभु ने
(उत्पति अध्याय 3:22 तथा 17:1 तथा 18:1 से 5 तथा 16 से 23 तथा 26.29.32.33 में)
कहा मनुष्य भले-बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है। इसलिए ऐसा न हो कि यह जीवन के वृक्ष वाला फल भी तोड़ कर खा ले और सदा जीवित रहे।
उपरोक्त विवरण से यह सिद्ध होता है कि जो आदम का प्रभु है ऐसा कोई और भी है तथा साकार है। इसीलिए तो कहा है कि मनुष्य जीवन फल को खाकर हम में से एक के समान हो गया है। क्योंकि बाइबल के उत्पत्ति ग्रंथ में लिखा है कि आदम ने भले बुरे का ज्ञान वाला फल तोड़कर खा लिया तो उसे पता चला वह नंगा है।  यहोवा परमेश्वर चलते हुए आ गया उसने आदम को पुकारा तू कहां है, तब आदम ने कहा कि मैं तेरी आवाज सुनकर छुप  गया हूं, क्योंकि मैं नंगा हूं, फिर परमेश्वर ने आदम तथा  उसकी पत्नी हवा को वस्त्र पहनाए है।
विचार करें कि पूर्ण परमात्मा भी शरीर मनुष्य जैसा आकार का है।


तथा अन्य प्रभु भी मनुष्य जैसे आकार के हैं।
जिससे पवित्र ईसाई तथा मुसलमान धर्म निराकार मानता है। तथा प्रभु एक से अधिक भी है।
 क्योंकि काल ब्रह्म सबके सामने नहीं आता
अपने तीनों पुत्रों रजोगुण  ब्रह्मा जी सद्गुण विष्णु जी  तमोगुण  शिव जी के द्वारा एक ब्रह्मांड का कार्य चला रखा है। हजरत आदम जी भगवान  ब्रह्मा जी के अवतार है।
हजरत आदम जी को ब्रह्मा जी ने बहका कर रखा था। उसी ने उसको वहां से निकाला था।
इसलिए कहा है कि भले बुरे का ज्ञान वाला फल खाकर आदम हम में से एक के समान हो गया है। क्योंकि ब्रह्मा जी विष्णु जी व महेश जी तीनों देवता है। हजरत ईसा के अवतार धारण करने के विषय में पवित्र बाइबल में लिखा है कि  ईश्वर ने पृथ्वी पर बढ़ रहे दुराचार के अंत के लिए अपने पुत्र को भेजा था।क्योंकि हजरत इसा जी भगवान विष्णु के अवतार हैं। विष्णु लोक से कोई देव आत्मा का जन्म मरियम के गर्भ से फरिश्ते द्वारा हुआ था।

गुरुवार, 4 जून 2020

कबीर परमेश्वर का प्रकट दिवस

      "कबीर साहेब का प्रकट दिवस"
सिर्फ कबीर जी का ही प्रकट दिवस क्यों ?
क्योंकि    ऋग्वेद के मंडल नंबर 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि वह कबीर  परमात्मा सतलोक से शिशु रूप धारण करके प्रकट होता है और कुंवारी गायों के दूध से उसकी परवरिश होती है ।
उसी ऋग्वेद  के मंडल नंबर 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में भी वर्णन है कि पूर्ण परमात्मा कबीर जी जान बूझकर बालक रूप में प्रकट होते है।
इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है ।



चारों युगों में सिर्फ कबीर परमात्मा के प्रकट होने के ही प्रमाण हैं।
सतयुग में सत सुकृत नाम से,
त्रेता में मुनीन्द्र नाम से,
द्वापर में करुणामय नाम से,
और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं।
बाकी सभी देव मां के गर्भ से जन्म लेते हैं।

हिन्दू मुस्लिम के बीच में, मेरा नाम कबीर।
आत्म उद्धार कारणे, अविगत धरा शरीर।।
कबीर साहेब ने इस वाणी में कहा है कि लोगो का आत्म उद्धार करने के लिए परमात्मा इस पृथ्वी पर प्रकट होते हैं।

जानिए अद्भुत रहस्य !
"5 जून कबीर साहेब प्रकट दिवस" के उपलक्ष्य में ज़रूर देखें जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी का महा सत्संग साधना चैनल पर सुबह 09 बजे से दोपहर 12 बजे तक ।

बुधवार, 3 जून 2020

कबीरपरमेश्वर_का_अद्भुतज्ञान

             कबीरपरमेश्वर_का_अद्भुतज्ञान
कबीर परमेश्वर ने ही  हिंदू  धर्म के धर्म शास्त्रों में छुपे गुढ़  यथार्थ ज्ञान को बताया कि ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म और मृत्यु होती है, ये अविनाशी नहीं है। 
यही प्रमाण श्रीमद्देवी भागवत पुराण, स्कंद 3, अध्याय 5 में है।
कबीर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है। इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल (ब्रह्म) हैं।
कबीर, मां अष्टंगी पिता निरंजन, ये जम दारुण वंशन अंजन।
तीन पुत्र अष्टंगी जाए, ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराए।।




कबीर परमेश्वर ने ही तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की वास्तविक स्थिति से परिचित करवाते हुए परमात्मा कबीर जी ने कहा :-
तिनके सूत है तीनों देवा, आंधर जीव करत हैं सेवा।

कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।
 उसी कबीर परमेश्वर का 623 वाॅ प्रकट दिवस है। 
       5 जून 2020.


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मंगलवार, 2 जून 2020

मगहर में कबीर परमेश्वर की अद्भुत चमत्कार

मगहर में कबीर परमेश्वर जी ने कई अद्भुत चमत्कार किये..
जैसे अकाल से बचाना, सूखी आमी नदी बहाना, सशरीर सतलोक जाना आदि देखकर तथा उनके‌ द्वारा दिए तत्वज्ञान का‌ अनुसरण करके मगहर के सर्व हिंदू-मुसलमान आज भी विशेष प्रेम से रहते हैं। आज तक उनकी धर्म के नाम पर कोई लड़ाई नहीं हुई।
एक बार परमात्मा कबीर साहेब जी जब 5 वर्ष की आयु के थे उस समय उन्होंने 104 वर्ष की आयु के रामानंद जी के साथ ज्ञान चर्चा की, उनके साथ कई लीलाएं की, अपना परिचय करवाया तथा सतलोक दिखाया तब रामानंद जी को दृढ़ विश्वास हुआ कि कबीर साहिब ही सृष्टि रचनहार पूर्ण ब्रह्म हैं।
 
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के चमत्कारों को विस्तार से जानने के लिए कृपया अवश्य सुने संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक।

भाई दूज कितनी सहायक

  भाई दूज कितनी सहायक भाई दूज का त्योहार दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन विगीता बहनें भाई बहन अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर पर ...