सत्य परमात्मा कौन है
प्रभु - स्वामी - ईश - राम - खुदा अल्लाह - रब - मालिक - साहेब - देव - भगवान - गॉड। यह परमात्मा के सर्व शक्ति बोधक शब्द है जो भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न भाषाओं में उच्चारण किए व लिखे जाते हैं।
परमात्मा की महिमा से प्रत्येक प्राणी प्रभावित है कोई शक्ति है जो परम सुखदायक व कष्ट निवारक है।
जो शक्ति अंधे को आँखे प्रदान करें, गूंगे को आवाज, बहरे को कानों से श्रवण करवा दे, बांझ को पुत्र दे, निर्धन को धनवान बना दे, रोगी को स्वस्थ करें, जिसके कारण यदि दर्शन हो जाए तो अति आनंद हो जो सर्व ब्रह्मांडो का रचनहार, पूर्ण शांति दायक, जगतगुरु तथा सर्वज्ञ है। जिसकी आज्ञा बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता। अर्थात सर्वशक्तिमान जिसके सामने कुछ भी असंभव नहीं, ऐसे गुण जिसमें है वह वास्तव में परमात्मा, स्वामी - राम - भगवान - खुदा - अल्लाह - रहीम - रब - गॉड कहलाता है।
अब विचारणीय विषय यह है कि परमात्मा कौन है? तथा कैसा है? वह किसने देखा है?
जिन जिन पुण्य आत्माओ ने परमात्मा को प्राप्त किया परमात्मा को देखा उन्होंने बताया कि सबका मालिक एक है। व उनके नाम संत गरीबदास जी छुड़ानी वाले, संत मलूक दास जी, संत घीसा दास जी, धनी धर्मदास जी, शिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी इन्होंने अपनी वाणी में बताया है कि परमात्मा मानव सदृश्य तेजोमय शरीर युक्त हैं जिसके एक रोम कूप में करोड़ सूर्य तथा चंद्रमा की रोशनी से अधिक प्रकाश है।
परमात्मा का वास्तविक नाम अपनी-अपनी भाषाओं में कविदेव (वेदों में संस्कृत भाषा में) तथा हक्का कबीर श्री गुरु ग्रंथ साहिब में पृष्ठ नंबर 721 पर क्षेत्रीय भाषा में, तथा सत कबीर श्री धर्मदास जी की वाणी में क्षेत्रीय भाषा में, तथा
बंदीछोड़ कबीर साहेब, संत गरीबदास जी के सद ग्रंथ में क्षेत्रीय भाषा में,
कबीरा कबीरन खबीरा खबीरन श्री कुरान शरीफ सूरह फुरकान नंबर 25 आयत नंबर 19, 21, 52 , 58 , 59 , में क्षेत्रीय अरबी भाषा में इसी पूर्ण परमात्मा के उपमात्मक नाम अनामी पुरुष, अगम पुरुष, अलख पुरुष, सतपुरुष, अकाल मुर्ति, शब्द स्वरूपी राम, पूर्णब्रह्म, परम अक्षर ब्रह्म, आदि है।


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